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Hindu College Old Effect

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हिंदू कॉलेज का हिन्दी विभाग विश्वविधालय के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित विभागों में से एक है,जिसमे स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर तक अध्यापन होता है| विभाग के निर्माण और विकास में जिन विद्वान शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, उनमें डॉ दशरथ ओझा, श्री कृष्ण शंकर शुक्ल, डॉ भरत सिंह उपाध्याय, डॉ मांधाता ओझा, डॉ कृष्णदत पालीवाल, डॉ हरीश नवल तथा डॉ सुरेश ऋतुपर्ण विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं| 

इस समय विभाग में सात स्थायी सदस्य हैं| यहाँ से शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों ने अकादमिक, प्रशासनिक, साहित्यिक, कॉरपोरेट सेक्टर, मीडिया रंगमंच और सिनेमा के क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सार्थक पहचान बनाई है|

अपने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए हिन्दी विभाग अनेक गतिविधियों का संयोजन संचालन करता है| हिन्दी साहित्य सभा साल में अनेक संगोष्ठियों का आयोजन करती है, जिनमें देश के प्रतिष्ठित विद्वानों का सानिध्य विद्यार्थियों को मिलता है| इस मंच से अंतर्महाविधायलयी स्तर पर विभिन्न सृजनात्मक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं| विभाग तीन पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है, जिनमें से दो ‘लहर’ एवं ‘अभिव्यक्ति’ भित्ती पत्रिकाएँ हैं| ‘हस्ताक्षर’ विभाग की अर्धवार्षिक हस्तलिखित पत्रिका है, जिसकी एक राष्ट्रीय पहचान है| इसके अतिरिक्त ‘अभिरंग’ विभाग की नाट्य-संस्था है जो विद्यार्थियों की अभिनय-क्षमता के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व के विकास में एक रचनात्मक भूमिका निभाती है| हिन्दू कॉलेज का हिन्दी विभाग साहित्य अध्यापन के माध्यम से सृजन और विचार का मुक्त आकाश बनाने की दिशा में प्रयासरत है| इस आकाश में उड़ान के लीए आपका स्वागत है |

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